Tag Archives: Gaya

शेहरी गरीबी एंव शेहरी अभिशासन पर परिचर्चा, चुनाव के पूर्व राजनीतिक जागरूकता अभियान – गया बिहार

गया! 21 फरवरी 2014
देश मे पिछले तीन दशको मे तेजी से बढ़ते हुए शहरीकरण और उससे संबंधित शहरी गरीबी और शहरी अभिशासन के मुददो पर आगामी लोक-सभा चुनाव के पूर्व राजनैतिक जागरूकता अभियान के अन्तर्गत दलित विकास अभियान समिति एवं प्रिया, निदान, आई.जी.एस.एस के द्वारा परिचर्चा का आयोजन किया गया।
प्रतिभागियो का स्वागत करते हुए दलित विकास अभियान समिति के निदेशक धर्मेन्द्र कुमार ने कहा की योजना आयोग के कार्य समूह के अनुसार देश का 70 प्रतिशत सकल घरेलु उत्पाद शहरो से होता है। इसमे 65 प्रतिशत योगदान सेवा क्षेत्र से आता है जिसमे अनौपचारिक क्षेत्र मे काम करने वाले असंगठित कामगारो का महत्वूपर्ण योगदान है। आज देश मे 2001-11 तक जहाॅ शहरी आवादी का विकास दर लगभग 32 प्रतिशत वही ग्रामीण आवादी की वृ़िद्व मात्र 12 प्रतिशत है। पिछले दस वर्षो मे बिहार के शहरी आवादी का दसकीय वृद्वि दर 34 प्रतिशत के लगभग रहा है। ये सारी बाते इस ओर इशारा करती है कि शहरी जनसंख्या मे तेजी से बढ़ोतरी हुई है, और फलस्वरूप मुलभूत सुविधाओ के मुददे भी उभरकर सामने आए है, जिनका समय रहते निदान आवश्यक है, और इसके लिए जरूरी है की राजनैतिक दल इन मुददो को देश के हित मे राष्टीªय एजेण्डा बनाए।
भाजपा जिलाध्यक्ष जयनंदर सिंह ने प्रतिभागियो को सम्बोधित करते हुए कहा की यदपि पार्टी मेनोफेस्टो राष्ट्रीय स्तर पर बनाया जाता है। किन्तु इस गतिविधि मे क्षेत्रीय स्तर के कार्यकत्र्ताओ की भूमिका होती है,अपने पार्टी के स्टैण्ड को स्पष्ट करते हुए की भाजपा शहरी क्षेत्रो मे शिक्षा और स्वास्थ्य पर बल देगी।
आप पार्टी के जिला संयोजक सुमन ने कहा आप पार्टी की शुरूआत ही स्लम क्षेत्र से हुई है। और पार्टी शहरी गरीबो के हित मे चाहे वे मूलभुत सुविधाओ का आभाव हो या अन्य कोई मुददा शहरी गरीब और शहरी लोगो के बीच कार्य करेगी।
राजद के बिजय यादव ने कहा कि उनकी पार्टी जब सत्ता मे थी तो उसने सामाजिक न्याय के तहत शहर और गाॅव दोनो मे वंचित वर्ग के सुविधाओ और माान-सम्मान पर कार्य किया। उनकी पार्टी गरीबो के मुददो को प्राथमिकता के तौर पर उठाती रहेगी।
अनुसूचित जाति मोर्चा के सबीर मंडल ने प्रतिभागियो को सम्बोधित करते हुए कहा की
प्रिया के राज्य समन्वयक अभिताभ भूषण ने अपनी प्रस्तुती मे कहा की आज देश की 38 करोड़ आवादी शहरी क्षेत्रो मे रहती है, और राष्ट्र के सकल घरेलु उत्पाद मे 60 प्रतिशत से ज्यादा योगदान करती है, फिर भी अगर हम आज देखे तो योजनाएॅ और परियोजनाओ की संख्या शहरी विकास के वनीसपत ग्रामीण विकास के क्षेत्र मे ज्यादा है। गौरतलब है की शहरी क्षेत्रो मे गरीब और गैर गरीब के बीच का अन्तर दिनोदिन बढ़ता ही जा रहा है। बढ़ती आवादी के साथ शहरो का बुनियादी ढांचा और शहरी अभिशासन जनसंख्या की जरूरतों को पुरा करने में अक्षम हो रहा है। वही दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी क्षेत्रों से अधिक विकास के लिए परिव्यय करने की परम्परा देश में रही है। ऐसी स्थितियों में जब तक राजनैतिक पार्टियाॅं शहरी क्षेत्रों के लिए स्पष्ट नितियों और कार्यक्रम नहीं लाते हैं, तब तक विकास दर को बढ़ाने में गतिरोध हो सकता है। इसके लिए राजनैतिक स्तर पर सोच और नितियों में परिवर्तन की आवश्यकता है।
इस परिचर्चा में प्रमुख रूप से राजीव कुमार कन्हैया, जय कुमार, मांझी, मंजू कुमारी एवं प्रिया के प्रोग्राम पदाधिकारी अभिषेक झा के अतिरिक्त वार्ड पार्षद, विकास मित्र, सामाजिक संगठन, स्लम विकास समिति के कैडर उपस्थित होकर विचार रखा।
पुरे परिचर्चा के दौरान ये बात सामने आई की राजनैतिक प्रतिनिधि शहरी मुद्दा पर अपने पार्टी के स्टैण्ड को स्पष्ट रूप से नहीं रख पाते हैं जिसका एक कारण यह भी है कि शहरी मुद्दे अभि तक राजनैतिक ऐजेण्डा के केन्द्रविन्दु के बाहर है। ऐसी स्थिति में ऐसे कार्यक्रम से ना सिर्फ शहरी मतदाता के बीच राजनैतिक चेतना बढ्रेगी बल्कि, साथ ही साथ प्रतिनिधियों के बीच भी इन मुद्दों की जानकारी बढ़ेगी और साथ ही साथ वो इन मुद्दों को हल करने के लिए सकारात्मक पहल करेंगें।

g

Advertisements

Pre-Election Political Awareness Campaign (PEPAC) -a national campaign to put urban on nation’s political agenda

Source: PRIA

The soul of India lives in its villages, said Gandhi Ji in the very beginning of twentieth century. So, rightly independent India embarked upon planned, ambitious and modestly successful rural development and rural governance initiatives. Indian political parties and national policy makers emphasized on need to bring positive changes in rural India.  But India has changed over the time. The India of twenty -first century is significantly urban and if the trends from Census 2011 and other contemporary population projection are indicators, India would be majority urban around 2030-2040.

But it seems our politicians and policy makers knowingly or unknowingly ignore urbanization trends and urban problems. The faster growth in urban is not limited to economy and geography of cities only. For the first in Indian Census history, absolute increase in urban Indian population was more than rural Indian population in Census 2011. The infrastructures and governance of our cities have not been able to adapt to growing population and its needs in the cities. Urban planning is at best no planning- a free for all in theory but land mafia-politician-bureaucrat nexus driven in practice. City authorities don’t have basic updated data about demography and geography of city. Urban departments lack appropriate capacities to handle urban issues. Capacity needs (skill-sets) and aspirations of individuals in cities are different from their counterparts in rural areas. But Indian bureaucracy is predominately trained for rural development and rural ethos. So, our bureaucrats find heterogeneity and informalities in urban areas beyond their appreciation and understanding.

Separate Section on Urban in Political Manifestos of                                             National and State Ruling Political Parties

National Party Yes/No Ruling Party

(State)

Yes/No Ruling Party

(State

Yes/No
BSP No AAP- Delhi Yes J&KNC – J&K No
BJP Yes AIIDMK – Tamil Nadu No NPF – Nagaland No
CPI No AINRC- Pondicherry No SAD – Punjab No
CPI (M) No ATC- W.B. No SDF- Sikkim Yes
INC Yes BJD – Odisha No SP – U.P. No
NCP No JD(U) – Bihar No

Source: Information from Copies of Manifestos for 2009 Lok Sabha Election

It is in the interest of not only cities but country as whole that political leaders and policy makers should provide due priorities to Urban by coming up with clear-cut vision and action plans for bringing better changes in lives in the cities. So, ‘urban is due’ in political manifestos and national polices! 

As a part of its Pre- Election Political Awareness Campaign (PEPAC) for urban governance and urban poverty PRIA along with partner organization organized a Commisionerate level consultation on 21st February 2014 at Gandhi Ashram, Gaya Bihar. The consultation witnessed a participation of representatives from various political parties’ viz. BJP, RJD, AAP, JD(U) ,  Anushuchit Jati Morcha along with elected representatives from Urban Local Bodies, representatives from CSOs, Academia, SIC members and representatives from media houses. The discussion and deliberation during the consultation revolved around the initiatives being taken by the political parties in their manifestos for highlighting and addressing the issues of urban poverty and urban governance for the forthcoming Lok Sabha elections.

Image

Here is a news clipping of the event:

Image